यहां की मिट्टी अब सोने सी चमक बिखेर रही है। जमीन की कीमत बड़े शहरों को मात कर रही है और इससे निबंधन विभाग के आय में भी खूब इजाफा हो रहा है। जमीन की खरीद-बिक्री पर दांव लगा रहे लोगों के लिए तो इसका मोल सोने से भी अधिक हो गया है। सोना की कीमत में चढ़ाव-उतराव से यह कभी-कभी घाटे का भी सौदा बन जाता है। लेकिन यहां की जमीन के दामों मे पिछले कई सालों से लगातार इजाफा हो रहा है।
निबंधन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि इस वित्तीय वर्ष में करीब शत प्रतिशत राजस्व वसूली की संभावना है। रजिस्ट्री से होने वाली आय पर गौर करें इस विभाग का वार्षिक लक्ष्य करोड़ों में है। जिले में स्थित जिला अवर निबंधन कार्यालय के अलावा तीन अन्य निबंधन कार्यालय मीरगंज, फुलवरिया तथा महम्मदपुर में कार्यरत हैं। आंकड़े बताते हैं कि जिले में जमीन की खरीद-बिक्री का सिलसिला साल 2006 से ही तेज होने लगा था। तब वित्तीय वर्ष 2006-07 में निबंधन विभाग को इससे 15 करोड़ रुपये का राजस्व मिला था। इसके बाद से हर साल जमीन की खरीद-बिक्री की गति तेज होती गयी और वित्तीय वर्ष 2010-11 में निबंधन विभाग की आय 27 करोड़ से अधिक हो गयी। आंकड़े बताते हैं कि साल 2010-11 के बाद जमीन की खरीद बिक्री का धंधा इतना चोखा हो गया है कि अगले वित्तीय वर्ष की समाप्ति तक निबंधन विभाग की आमदनी में 8 करोड़ रुपये का और इजाफा हो गया। आंकड़ों पर गैर करें तो वित्तीय वर्ष 2011-12 में जमीन की खरीद बिक्री पर निबंधन और मुद्रांक शुल्क के रूप में निबंधन विभाग को 35 करोड़ से अधिक की आय हुई। इस वित्तीय वर्ष में भी जमीन के दाम अनमोल ही बने रहे। वर्तमान वर्ष में मुद्रांक शुल्क के रूप में आने वाले आय का यह आंकड़ा और बढ़ा है। जानकारों की मानें तो जिले में पिछले दो साल से जमीन, इन्वेंस्मेंट का भी एक महत्वपूर्ण जरिया बन कर उभरी है। इसकी एक मात्र वजह तेजी से भाग रहे जमीन के दाम है। सोने, चांदी या शेयर का मार्केट चढ़ता-उतरता रहता है, लेकिन जमीन के दाम का ग्राफ सिर्फ चढ़ता ही जा रहा है। इसमें पैसा इन्वेस्ट करने वालों के लिए कहीं से भी जमीन घाटे का सौदा नहीं साबित हो रहा है।
मध्य वर्ग भी आजमा रहा हाथ
जमीन के धंधे में हो रहे मुनाफे को देख उच्च वर्ग के अलावा अब मध्य वर्ग के लोग भी इस धंधे में हाथ आजमा रहे है। सूत्रों के अनुसार चार, छह या उससे अधिक लोग एक चेन सर्किल तैयार कर गांवों या शहर के बाहरी क्षेत्रों में जमीन ले रहे है और दाम बढ़ने पर उसे बेचकर जो मुनाफा मिल रहा है, हिस्सेदारी के मुताबिक बांट ले रहे है। शहर में ऐसे कई चेन सर्किल काम कर रहे है।
पूंजीपति भी कर रहे फाइनेंस
जमीन के धंधे में अब स्थानीय से लेकर दूसरे जिले के पूंजीपति भी फाइनेंस कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो शहर और दूसरे जिले के कई पूंजीपति भी परदे के पीछे से इस धंधे में लगे हुए है। चूंकि कई जगह प्रापर्टी होने की वजह से वे अपना नाम सार्वजनिक नहीं होने देना चाहते, लिहाजा इस धंधे में लगे कुछ छोटे-छोटे चेन सर्किल वालों को वे फाइनेंस कर रहे है। मूल रकम के अलावा इससे होने वाले मुनाफे में उनका भी हिस्सा तय रहता है। इससे बिना नाम सामने आये वे मोटा मुनाफा कमा रहे है।