बिजली की दशा में सुधार के लिए प्रयास हुए तो उसका असर भी दिख रहा है। बावजूद इसके बिजली का संकट अब भी समाप्त नहीं हुआ है। जर्जर तार बदलने का असर यह हुआ है कि अब तार टूटते कम हैं। बावजूद अभी भी शहर के ग्रामीण इलाकों में पोल पर लटकते तारों का मकड़जाल लगा हुआ है। इसके साथ ही चौबीस घंटे की बिजली अब भी नहीं मिल पाती। इसका असली कारण मांग के अनुरुप बिजली की आपूर्ति का नहीं होना है।
पिछले दो साल के लगातार प्रयास के कारण बिजली की स्थिति में हर क्षेत्र में दिखने लगा है। कभी चंद मिनट के लिए आने वाली बिजली अब घंटों उपलब्ध रहती है। इससे लोगों का विश्वास विभाग के प्रति बदला है। लेकिन ग्रामीण इलाकों में जले ट्रांसफार्मर को बदलने का कार्य निर्धारित अवधि के अंदर पूर्ण नहीं हो पाता। इसके लिए काफी हद तक बिजली विभाग के अधिकारी ही जिम्मेदार हैं। 24 घंटे और महीने की मियाद कौन कहे, यहां ग्रामीण इलाकों के खराब ट्रांसफार्मर चार-छह माह में बदल जाए, तो भी लोग अपने को किस्मत वाले मानते हैं। यहां बिजली की मांग और मिल रही आपूर्ति में अब भी काफी अंतर है। बावजूद इसके शहर से लेकर गांव तक में विद्युत की आपूर्ति में कुछ सुधार हुआ जरुर है। बावजूद इसके पावर कट यहां की नियति बनी हुई है। जाहिर है जब तक मांग के अनुरुप बिजली की आपूर्ति नहीं होती, तब तक बिजली समस्या बनी रहेगी।
चौबीस घंटे नहीं मिल पा रही बिजली
सरकार ने जिला व अनुमंडल मुख्यालयों में चौबीस घंटे बिजली उपलब्ध कराने का दावा किया है। बावजूद इसके आपूर्ति कम होने के कारण बिजली की आपूर्ति निर्धारित समय के अनुसार नहीं हो पाती। आलम यह कि लोगों को कब बिजली मिलेगी और कब पावर कट रहेगा, इस बात की यहां कोई भी गारंटी नहीं है। इस मामले में विभाग कुछ मनमर्जी भी दिखाता है। शहर में बिजली विभाग द्वारा तारों को बदले जाने के बाद भी पोल से तारों का मकड़जाल अब भी नहीं हट सका है। तारों के मकड़जाल को देखकर आम आदमी यह नहीं समझ पाता कि उसके घर में बिजली की आपूर्ति करने वाला तार कौन सा है। विद्युत विभाग द्वारा इस स्थिति को ठीक करने के लिए कोई भी प्रयास नहीं किया गया है। यहीं कारण है कि आए दिन सड़क की सड़कों पर तार के मकड़जाल के बीच शार्ट सर्किट की समस्या पैदा होती है।
मांग से काफी कम मिल रही बिजली
यहां मांग के अनुरूप बिजली नहीं मिलना वर्षो से एक बड़ी समस्या बनी हुई है। जिले में 60 मेगावाट बिजली की जरुरत है। पर, जिले को महज 25 मेगावाट बिजली की ही आपूर्ति हो रही है। मांग से काफी कम बिजली की आपूर्ति होने से एक इलाके में रोशनी तो दूसरे में अंधेरा की स्थिति बनती है।
अब भी सौ गांवों में नहीं पहुंची बिजली
जिले के 1576 गांवों में से करीब एक सौ गांवों में आज भी बिजली नहीं पहुंच सकी है। आये दिन बिजली के लिए लोग आंदोलन को विवश होते हैं। लेकिन स्थिति में कोई भी सुधार अबतक नहीं हो सका है। सरकारी आंकड़ों की मानें तो इनमें से अधिकांश गांवों में बिजली के लिए मुख्यमंत्री क्षेत्र विकास योजना के तहत विधायकों ने राशि भी अपने मद से उपलब्ध करा दिया है। बावजूद इसके गांवों में बिजली अबतक नहीं पहुंच सकी है।
गलत बिलिंग बड़ी समस्या
उपभोक्ता इन दिनों बिजली विभाग की गलत बिलिंग को लेकर परेशान हैं। कई लोगों को एक व दो माह का बिजली बिल एक-एक लाख का थमाया जा चुका है। ऐसे में उपभोक्ता गलत बिल आने के कारण मानसिक रूप से परेशान होते हैं। बावजूद इसके गलत बिलिंग विभाग की ओर से अब भी जारी है।
क्या है समस्या का असली कारण
* मांग के अनुरुप बिजली की आपूर्ति नहीं होना।
* बिजली विभाग में संसाधन की कमी।
* पोल पर तार के मकड़जाल को हटाने में लगातार सुस्ती।
* आधिकारिक स्तर पर समस्या के समाधान में सुस्ती।
* राजस्व वसूली का लक्ष्य पूर्ण नहीं किया जाना।
कैसे समाप्त होगा गतिरोध
* बदले जाएं जर्जर बिजली के तार।
* जिले को मिले 60 मेगावाट बिजली।
* समस्याओं के निराकरण के प्रति सतर्क रहें अधिकारी।
* बिजली विभाग बढ़ाए अपने संसाधन।
* बकाया बिजली बिल जमा करने में लोग लें रूचि।