Gopalganj News: मछली उत्पादन पर पड़ने लगी सूखे की मार

Sat, 09 Apr 2016

पिछले चार साल से लगातार कम बारिश होने का असर अब जिले के मछली उत्पादन पर पड़ने लगा है। आलम यह है कि सूखे की मार से मछली उत्पादन में 60 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गयी है। जिससे मत्स्य विभाग भी चिंता में पड़ गया है। मछली पालन के लिए कम से कम 3.5 फीट पानी किसी भी तालाब में होना आवश्यक है। लेकिन पिछले चार साल से कम बारिश होने के कारण जिले के जल स्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है।

मत्स्य विभाग के अनुसार बारिश ने जिले में करीब 862 सरकारी तालाब में मछली पालक करने वालों के समक्ष गंभीर समस्या उत्पन्न कर दिया है। कम उत्पादन होने के कारण मछली पालकों का मुनाफा कम हो रहा है। ऐसे में जिले के प्रगतिशील किसान मछली पालक को घाटे को सौदा मानकर इससे पिंड छुड़ाना चाहते है। विभागीय अधिकारियों की मानें तो जिले में लगभग 10 मीट्रिक टन मछली का उत्पादन होता था, लेकिन सूखे के कारण सिमटते जल क्षेत्र से मछली का उत्पादन कम होने लगा है।

मुश्किल में मछली पालक

मछली पालकों के समक्ष आर्थिक संकट गहराने लगा है। सूखे की मार झेल रहे मछली पालक उत्पादन कम होने के कारण चिंतित है। मांझा प्रखंड के मछली पालक ओम तिवारी बताते है कि पिछले दो साल से कम बारिश होने के कारण तालाब सूखे रहे है। जिसका असर मछली पालन पर पड़ रहा है। अगर बोरिंग के माध्यम से तालाब में पानी भरवाया जाता है, तो लागत मूल्य में वृद्घि होती है। इसके बावजूद उत्पादन कम होता है तो पूंजी निकलना भी मुश्किल हो जाता है। एक मछली पालक ने बताया कि मछली पालक इस आस से थे कि अच्छा उत्पादन होने पर अपनी बेटी की शादी करेंगे। लेकिन सूखे की ऐसी मार पड़ी की पूंजी निकलना भी मुश्किल हो गया है।

बोरिंग की व्यवस्था नहीं

जिले में 862 सरकारी तालाबों में मछली पालन किया जाता है। इन तालाबों का जल स्त्रोत या तो बारिश पर निर्भर रहता है या फिर भूमिगत जल के माध्यम से इन तालाबों में मछली पालन किया जाता है। सरकारी तालाबों पर बोरिंग नहीं होने के कारण मछली पालन बारिश पर ही निर्भर है।

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