बरसात के दिनों में बारिश के पानी को बचाने व उसके संरक्षण बातें हुई। इस योजना को कड़ाई से धरातल पर लागू करने के दावे भी किए गए। इसके बाद भी जल संरक्षण की यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी। आज भी बारिश का पानी बेकार में बह जाता है। हां, जल के संरक्षण की बातें अब भी सेमीनार में होती हैं। लेकिन उसका अनुपालन कदापि होता नहीं दिख रहा। सेमीनार पर प्रति वर्ष लाखों रुपये भी खर्च होते हैं।
लगातार जलस्तर में हो रही कमी को देखते हुए सरकारी स्तर पर जल के संरक्षण के दिशा में विशेष रूप से ध्यान दिये जाने की योजना बनायी जाती है। इस अभियान के तहत बारिश के पानी के संरक्षण के उपायों के बारे में आम लोगों को बताया जाता है। लेकिन पूरे जिले में इस तरह कोई भी अभियान एक दिन के लिए भी नहीं चलता। यहीं कारण है कि प्रतिवर्ष यहां बारिश का पानी बेकार चला जाता है। ऐसे में यह योजना अबतक धरातल पर हवा-हवाई ही साबित हुई है।
सेमीनार तक सिमट गया संरक्षण
वर्तमान समय में पूरे जिले में जल संरक्षण की कोई भी योजना संचालित नहीं है। हां कागज पर इसके लिए प्रयास जरुर होते रहे हैं। प्रतिवर्ष जल संरक्षण के बारे में आम लोगों को जानकारियां देने के लिए सेमीनार जरुर आयोजित किये गये। इन पर लाखों रुपये खर्च भी हुए। लेकिन स्थिति जस-की-तस बनी हुई है।
गैर सरकारी प्रयास रहे निरर्थक
बारिश के पानी को बचाने के दिशा में सरकारी या गैर सरकारी स्तर पर किये गये तमाम प्रयास भी निरर्थक ही साबित हुए हैं। गैर सरकारी स्तर पर भी पूरे साल में कहीं भी कोई योजना चलती नजर नहीं आ सकी है।
पेयजल की होती है जांच
पीने योग्य पानी की जांच की व्यवस्था जिला मुख्यालय में उपलब्ध है। जल जांच प्रयोगशाला के माध्यम से इनकी जांच की व्यवस्था है। बावजूद इसके जल जांच पर भी सवाल उठते रहे हैं। गांवों के लोग अब भी केवल बीस से पच्चीस फीट नीचे जमीन का पानी पीने को विवश होते हैं।
पास होते रहे हैं नक्शे
भले ही मकान का नक्शा पास करने के पूर्व जल संरक्षण की बातों पर भी ध्यान देने का निर्देश सरकारी स्तर पर दिया गया है। इसके बाद भी जल संरक्षण की बातें तय किये बगैर ही मकानों का नक्शा पास करने का कार्य किया जाता है।
क्या कहते हैं लोग
जल के सरंक्षण के संबंध में आम लोग भी सरकारी स्तर पर विशेष अभियान शुरू करने की बातें कहतें हैं। गोपालगंज शहरी क्षेत्र के रामबाबू प्रसाद कहते हैं कि बात सेमीनार से आगे बढ़ाने के दिशा में विभाग को आगे आना होगा। पूरे जिले में जल संरक्षण के दिशा में कोई भी अपेक्षित प्रयास नहीं दिखता है। राजेन्द्र सिंह कहते हैं कि अब वह समय आ गया है कि जल संरक्षण के दिशा में प्रयास हो। अबतक इस दिशा में किये गये तमाम प्रयास नाकाफी हैं।