रात तो रात अब तो दिन में भी परेशान कर रहे मच्छरों और मक्खियों से निजात पाने के लिए अगर आप विभागीय पहल की उम्मीद पाले हों तो उसे अब भूल जाइए। मलेरिया व कालाजार जैसी बीमारियों पर नियंत्रण के नाम पर ही सही, मच्छर और मक्खी मारने का विभागीय प्रयास छिड़काव कर्मियों के प्रशिक्षण तक ही सिमट कर रह गया। ऐसे में मच्छर और मक्खी से इस बार जंग लोगों को खुद अपने दम पर ही लड़नी होगी।
जिले में मलेरिया व कालाजार से रोकथाम के लिए विभागीय स्तर पर प्रत्येक साल फरवरी व मार्च माह में डीडीटी का छिड़काव कराया जाता था। लेकिन इस साल डीडीटी का छिड़काव अबतक कई इलाकों में हुआ ही नहीं। ऐसा तब है जबकि जिला स्वास्थ विभाग सभी प्रखंडों के छिड़काव कर्मियों को डीडीटी छिड़काव के लिए प्रशिक्षित करने का अभियान चला चुका है। स्वास्थ्य विभाग की मानें तो इस बार डीडीटी का छिड़काव कई इलाकों में किया गया है।
पांच सौ से अधिक मलेरिया रोगियों की संख्या
वर्तमान समय में मच्छरों के आतंक के कारण मलेरिया से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ गयी है। सरकारी अस्पताल से लेकर जिला मुख्यालय स्थित कई निजी क्लिनिक में पांच सौ से अधिक मलेरिया से पीड़ित मरीजों का इलाज चल रहा है।
अभी भी हैं कालाजार के मरीज
जिले में कालाजार के रोगियों की संख्या में कमी नहीं है। प्रत्येक वर्ष की तरह दस वर्ष भी कालाजार से पीड़ित रोगियों की संख्या सामने आयी है। बावजूद इसके विभागीय स्तर पर कालाजार के रोकथाम के दिशा में समूचित प्रयास नहीं किया गया।