इमरजेंसी के चिकित्सक के भरोसे आइसीयू

कहने को तो सदर अस्पताल में आइसीयू की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन यहां भर्ती होने वाले मरीज डाक्टरों की कमी जैसी समस्या से जूझने को विवश हैं। आलम यह कि यहां भर्ती मरीजों के इलाज की जिम्मेदारी इमरजेंसी में तैनात डाक्टर की ही है। ऐसे में गंभीर रूप से बीमार मरीजों को यहां कई बार विकट स्थिति से भी गुजरने को विवश होना पड़ता है।

आधिकारिक सूत्रों की मानें तो आइसीयू में नियमों के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती किये जाने का प्रावधान है। बावजूद इसके सदर अस्पताल में मौजूद आईसीयू में भर्ती मरीजों को इमरजेंसी में तैनात डाक्टर के भरोसे ही इलाज को विवश होना पड़ता है। यह स्थिति तब है, जबकि सरकार ने आइसीयू की स्थिति में सुधार के लिए कई बार दिशानिर्देश जारी कर रखा है। जिला स्तर पर चिकित्सकों की कमी का बहाना स्वास्थ्य महकमे के आला अधिकारी बताते हैं। ऐसे में यहां एक बार भर्ती होने वाले मरीज को अस्पताल से छुट्टी तक एएनएम के भरोसे ही रहने को विवश होना पड़ता है।

आंख के विशेषज्ञ करते हैं इमरजेंसी की ड्यूटी

सदर अस्पताल की लचर स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां आंख के विशेषज्ञ डाक्टर को इमरजेंसी में लगा दिया जाता है। इनकी तैनाती करने वाले अधिकारी शायद यह बात भूल जाते हैं कि इमरजेंसी में हार्ट व लीबर जैसी संगीन बीमारियों से पीड़ित लोग पहुंचते हैं। ऐसे में यहां विशेषज्ञ डाक्टरों की जरुरत होती है। बावजूद इसके स्वास्थ्य महकमे को इस बात से कुछ भी लेना व देना नहीं है।

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