परीक्षा नजदीक, बढ़ी गेस व गाइड की बिक्री

स्कूल कालेजों में जाकर पढ़ना व नोट्स बनाना अब बीते जमाने की बात हो गयी है। स्कूलों व कालेजों में शिक्षकों की कमी एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। ऐसे में कुछ छात्र-छात्राएं कोचिंग के भरोसे नैया को पार लगाने की फिराक में हैं तो कुछ गाइड के सहारे 10वीं तथा 12वीं की परीक्षा को पास करने की जुगत में लगे हैं। हालत यहां तक आ गयी है परीक्षा नजदीक आने के साथ ही गाइड, गेस तथा सेंपल पेपरों की बिक्री तेज हो गयी है।

वैसे अभिभावक तो बच्चों को बेहतर शिक्षा दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन स्कूलों व कालेजों में गुरू व शिष्य की परंपरा विलुप्त सी हो गयी है तथा शिक्षा के पुरातन धर्म का भी पूर्ण रूप से व्यवसायीकरण हो गया है। बाकी कुछ बेहतर एजुकेशन व्यवस्था के लिए तैनात शिक्षा विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के भेंट चढ़ गया। आकस्मिक निरीक्षण का अब कोई भी असर नहीं दिख रहा। ऐसे में शिक्षा विभाग की व्यवस्था रेंगती नजर आ रही है। आंकड़ों पर गौर करें तो साल के 365 दिन में से सौ-सवा सौ दिन तो रविवार, ग्रीष्मावकाश तथा पर्व त्योहारों में निकल जाते हैं। शेष बचे दिन में कभी हड़ताल, कभी चुनाव, कभी प्रशिक्षण तो कभी सर्वेक्षण के कार्य भी शिक्षक शामिल रहते हैं। अगर कुछ समय बच गया तो गुरुजी को संगठन के कार्यो के अलावा प्रमंडलीय व राज्य स्तरीय सम्मेलनों में भाग लेने में बीत जाते हैं। ऐसे में बेहतर शिक्षा की परिकल्पना समझ से बाहर है। हर साल फरवरी व मार्च माह में आता है बोर्ड की परीक्षाओं का समय। छात्रों के समक्ष सिलेबस पूरा करने की परेशानी होती है। ऐसे में वे पहले कोचिंग सेंटरों का सहारा लेते हैं और अंत में 10वीं और 12वीं कक्षा के लिए बाजार में बिक रहे गाइड, गेस, क्वेश्चन बैंक, सेंपल पेपर, माडल सेट तथा आनन्द एटम बम का सहारा लेते हैं। पुस्तकों की बिक्री के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्ष 2015 में किताब बिके 22 हजार सेट और विभिन्न प्रकाशनों के गाइड बिक चुके हैं 40 हजार।

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