भारतीय वैदिक संस्कृति विश्व में सबसे प्राचीनतम संस्कृति है। ऋग्वेद भी प्राचीनतम ग्रंथ है। ऐसे में यदि विश्व के किसी धर्म के लोगों को संस्कृति के बारे में जानना है तो भारतीय मनीषियों की चरण धुली लेकर सीखें। ये बातें दरभंगा संस्कृत विश्व वद्यालय के कुलपति डा. देवनारायण झा ने बुधवार को विजयीपुर स्थित श्रीराम संस्कृत महाविद्यालय में आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि अगर चतुर्वेद ज्ञानवान बनना चाहते हैं तो संस्कृत सीखें। संस्कृत पढ़ने वाला कभी आतंकवादी नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि आज संस्कृत भाषा को एक जाति की भाषा मानकर तिरस्कृत कर दिया गया है। लेकिन संस्कृत किसी धर्म या जाति की भाषा नहीं है। यह संपूर्ण मानव कल्याण की भाषा है। संगोष्ठी में मुजफ्फरपुर संस्कृत विद्यालय के प्राचार्य श्रीप्रकाश पाण्डेय, शैलेंद्र कुमार, विजयीपुर महाविद्यालय के प्राचार्य रामेश्वर राय, शर्मानंद पाण्डेय, राजेश्वर प्रसाद सिंह ने भी अपने विचार रखे।