गोवर्द्घन पूजा के साथ ही लग्न के मौसम की भी शुरुआत हो गई। जिन घरों में शादी होनी है, वहां टेंट व शामियाना की जरूरत होती है। लोग अभी से टेंट व शामियाना की खोज में लग गए हैं। लेकिन यहां टेंट के कारोबार में लगे संचालकों को लूट की छूट मिली हुई है। शायद ही कोई टेंट संचालक सर्विस टैक्स जमा करता हो। लेकिन हरेक टेंट संचालक मनमाने दर की वसूली में लगा है। प्रशासन को भी इस बात से मतलब नहीं है। ऐसे में टेंट संचालकों की झोली भर रही है और लगन के इस मौसम में आम लोग हर दिन लूट रहे हैं।
सूत्र बताते हैं कि टेंट का कारोबार करने वालों को मुजफ्फरपुर स्थित क्षेत्रिय कार्यालय से अपने टेंट के कारोबार का रजिस्ट्रेशन कराना है। इसके लिए उन्हें प्रति वर्ष बकायदा सर्विस टैक्स का भुगतान भी करना है। लेकिन यहां इस नियम का अनुपालन नहीं होता। ऐसे में प्रति वर्ष सरकार को सर्विस टैक्स का करोड़ों रुपये का चूना लग रहा है। इस नियम का अनुपालन करने के लिए जिला स्तर पर कोई भी व्यवस्था नहीं होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। हद तो यह कि सरकार द्वारा निर्धारित दर से चार गुना तक अधिक पैसों की वसूली आम लोगों से टेंट संचालक करते हैं। यह अवैध वसूली लगन के मौसम में और बढ़ जाती है।
मजदूर का भी कराना है निबंधन
नियमों की बात करें तो क्षेत्रिय कार्यालय मुजफ्फरपुर से निबंधन कराने के साथ ही हरेक टेंट संचालक को जिला श्रम कार्यालय से भी मजदूरों का निबंधन कराना है। टेंट का कारोबार करने वालों को सरकार द्वारा निर्धारित दर से ही मजदूरों को पैसों का भुगतान किया जाना है। आठ घंटे के कार्य के लिए प्रति मजदूर राशि 144 रुपये देय है। लेकिन टेंट संचालक चौबीस घंटे के लिए केवल दो सौ रुपये का ही भुगतान श्रमिकों को करते हैं।
आग पर काबू पाने की नहीं है व्यवस्था
नियमों के अनुसार हरेक टेंट संचालक को आग लगने की स्थिति में उसपर काबू रखने के लिए अग्निशमन विभाग के मानकों के अनुसार व्यवस्था करनी है। इसके तहत फायर कंट्रोल यूनिट भी साथ में रखना है। लेकिन पूरे जिले में संचालित एक भी टेंट हाउस में यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।
संचालित टेंट दुकानों की स्थिति
गोपालगंज जिले में वर्तमान समय में 370 टेंट की दुकानें संचालित हैं। इनमें से कुछ टेंट की दुकानें गोपालगंज, मीरगंज, बरौली तथा कटेया शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं। ग्रामीण इलाकों में भी टेंट की दुकानें कम नहीं हैं। लेकिन इनमें से दो-तीन टेंट दुकानों को छोड़ किसी भी दुकान का क्षेत्रिय कार्यालय में निबंधन नहीं है।
कर रहे टैक्स की चोरी
क्षेत्रीय निबंधन कार्यालय में बगैर रजिस्ट्रेशन के टेंट संचालक प्रति वर्ष लाखों रुपये का चूना सरकार को लगा रहे है। विभाग की मानें तो प्रति वर्ष एक टेंट संचालक को 16 हजार रुपये देना होता है। लेकिन यहां बगैर निबंधन के दर्जनों टेंट की दुकानें चल रही हैं।
टेंट दुकानों की स्थिति
प्रखंड कितने दुकान
गोपालगंज 32
बरौली 24
मांझा 21
बैकुंठपुर 27
सिधवलिया 23
कुचायकोट 33
थावे 19
हथुआ 25
मीरगंज 28
पंचदेवरी 19
कटेया 23
भोरे 27
फुलवरिया 21
उंचकागांव 25
विजयीपुर 26
नोट :- इनमें कुछ दुकानें प्रखंड मुख्यालय में तो कुछ दुकानें छोटे-छोटे बाजारों में हैं।
निर्धारित सरकारी दर व वसूली की स्थिति
- 24 घंटे के लिए -
सामान सरकारी दर वसूली
टेंट 202 रुपये 600 रु.
शामियाना 129 रु. 1200 रु.
कुर्सी प्लास्टिक 3 रु. 5 रु.
कुर्सी वीआईपी 5 रु. 10 रु.
टेबल 10 रु. 20 रु.
टेबल क्लाथ 2 रु. 10 रु.
जेनरेटर 600 रु. 1200 रु.
साउंड 500 रु. 1000 रु.
गद्दा 5 रु. 10 रु.
बेडसीट 2 रु. 5 रु.
नोट :- सरकारी दर में सामन के साथ भाड़ा देय नहीं है। निजी काम में दोनों तरफ का भाड़ा वसूला जाता है।