अनंतश्रीविभूषित परम सिद्ध संत बाबा विश्वंभर दासजी महाराज के संयोजन एवं अध्यक्षता में वैष्णव मठ गौरा(पूरब) में चल रहे गायत्री पुरश्वरण महायज्ञ के कथा मंच से कथा व्यास जगतगुरु श्री श्री 1008 रामानंदाचार्य जी महाराज के कथा का क्रम आगे बढ़ाते हुए कहा कि राजा परीक्षित जब अभिमन्यू की पत्नी उत्तरा के गर्भ में थे तभी अश्वत्थामा ने अपने ब्रहास्त्र की दिशा को उस गर्भ की तरफ मोड़ दिया था। शरणागत उत्तरा के उस गर्भ की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने चक्र सुदर्शन के साथ योगबल से उत्तर के गर्भ मे प्रवेश किया और सतत उसकी रक्षा करते रहे। जन्म के पश्चात परीक्षित ने आने वाले कलियुग को युद्ध में पराजित किया। लेकिन उसे शरणागत होने पर उसे रहने उसे रहने के लिए मदिरा, जुआ एवं सोना जैसे पांच स्थान दिये। एक दिन स्वर्ण मुकुट धारण करने पर वहीं कलयुग उन पर हावी हो गया और उनकी बुद्धि भ्रष्ट करा दी। जिसके कारण उन्होंने ऋषि का अपमान किया एवं ऋषिपुत्र द्वारा शापित हुए। सात दिनों के बाद तक्षक नाग द्वारा डंसे जाने के समाचार को जानने के बाद परीक्षित को जो भय हुआ वह मृत्यु का भय नहीं था। अपितु वह अपमृत्यु एवं उसके कारण होने वाली रकवास एवं कुकर शुकर योनि प्राप्त करने जैसी दुर्गति का भय था। शुकदेव मुनि जैसे उत्तम वक्ता से भागवत कथा सुन कर उन्हें अभय पद की प्राप्ति हुई। जगतगुरु ने बताया कि मनुष्य जीवन भर सुख की खोज करता हुआ माया के छलावे में भटकता रहता है। वह जो भी सुख के साधना जुटाता है, वे नश्वर होने कारण अंतत दुख ही देते हैं। मनुष्य जब सदगुरु की कृपा से ईश्वर शरणागति प्राप्त करता है तो उसे शाश्वत आनंद की उपलब्धि होती है। कथा प्रारंभ होने के पूर्व बलराम दुबे ने कथा व्यास जगतगुरु श्री श्री 1008 श्री रामानन्दाचार्य के लिए स्वागत गान गाया एवं अनंतश्रीभूषित बाबा विश्वंभर दासजी का महिमा गान किया। बाबाजी ने चंदन तिलक, रेशमी धौतवस्त्र एवं पुष्पमाल से कथाव्यास महाराज का अभिनंदन किया। मणि रामदासजी, ब्रह्मचारी अर्धेन्दु बाबू, ब्रह्मचारी सर्वेश, सेवानिवृत शिक्षा अधिकारी लालजी पाण्डेय, सेवानिवृत प्राचार्य सुरेंद्र पाण्डेय, सेवानिवृत प्राचार्य विजय शंकर पाण्डेय, ब्लाक प्रमुख पति आनंद मिश्र, जितेंद्र तिवारी, मुरलीधर तिवारी, उपेंद्र पाण्डेय, विरेंद्र तिवारी ने भी कथा व्यासजी का पूजन वंदन किया। मंच संचालन पंकज शुक्ल ने किया। आचार्य धर्मेद्र शुक्ल ने स्वरचित भोजपुरी कविता से कथा एवं कथा व्यास का महिमा गान किया। जपयज्ञ एवं हवन आहुति चंद्रभान मिश्र, पंकज शुक्ल, मुरलीधर मिश्र, घनश्याम मिश्र के नेतृत्व में शताधिक पंडितों द्वारा जारी रहा। व्यवस्था का गुरुतर भार दीपक मिश्र, ओमप्रकाश तिवारी, नरेंद्र तिवारी, गिरीश तिवारी इत्यादि ब्रह्मचारी अर्धेन्दु के नेतृत्व में सम्हालते रहे। हजारों श्रद्धालु परिक्रमा करते रहे। मेलार्थियों ने मेला में झूला, बुलेट ट्रेन एवं मौत का कुआं का लुत्फ लिए। बरहज से आए नवाब खान अपने शहनाई वादन से ठाकुरजी की सेवा कर भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रासलीला के मंच पर ललिता विशाखा सहित आठों सखियों तथा युगल सरकार राधा माधव के माहारस से रसों वै स: की प्रत्यक्ष अनुभूति हुई।