कोर्ट से जमानत लेने के बाद जमानतदार बनाए जाने के मामले में फर्जीवाड़ा का मामला उजागर हुआ है। दशम अवर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद पीठ लिपिक के बयान पर थाने में एक अधिवक्ता सहित सात लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की गयी है। कांड अंकित करने के साथ ही पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर शनिवार को सीजेएम के न्यायालय में पेश किया। तीनों आरोपियों को दस मार्च तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि विश्वंभरपुर थाने में दर्ज एक आपराधिक मामले में तीन आरोपियों की अग्रिम जमानत मंजूर होने के बाद इस मामले में दशम अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के न्यायालय में शुक्रवार को बेल बांड दाखिल किया गया। न्यायिक दंडाधिकारी ने दाखिल किये गये बंध पत्र की खुद अपने स्तर पर जांच करने का निर्णय लिया। इस बात की भनक लगने के साथ ही जमानतदार बने छह में से तीन लोग कागजात आदि छोड़कर फरार हो गये। जब दाखिल किये गये बंध पत्रों की जांच हुई तो इस बात का खुलासा हुआ कि नगर थाना के तुरकहां गांव के किशोर राम, उंचकागांव थाना के नारायणपुर गांव के मनोज राम तथा जादोपुर थाना क्षेत्र के मकसुदपुर गांव के छोटेलाल सिंह उर्फ सहनी की ओर से दाखिल पहचान पत्र ही फर्जी है। जांच के दौरान इनकी ओर से दाखिल किये गये संपत्ति के कागजात को भी प्रथम दृष्टया जाली पाया गया। हद तो यह कि बंध पत्र पर धु्रवनाथ सिंह नामक अधिवक्ता भी हस्ताक्षर पाया गया। फर्जी लोगों के नाम पर बंध पत्र भरे जाने का यह मामला उजागर होने के साथ ही प्रभारी पीठ लिपिक सुजीत कुमार सिंह ने नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी। साथ ही बंध पत्र की जांच के समय मौजूद तीनों लोगों को पुलिस को सौंप दिया। पकड़े गये किशोर राम, मनोज राम तथा छोटेलाल सिंह उर्फ सहनी को शनिवार की शाम जेल भेज दिया। इनके अलावा पीठ लिपिक ने दर्ज प्राथमिकी में मकसुदपुर गांव के रामाशंकर चौधरी, एकडेरवां गांव के गोरख सिंह, खवाजेपुर गांव के राधेश्याम सिंह तथा अधिवक्ता धु्रवनाथ सिंह को नामजद किया गया है।