गर्मी में इस बार भी राह चलते प्यास लगने पर होटलों से लेकर किसी के घर का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा। सरकार ने सार्वजनिक स्थलों से लेकर महत्वपूर्ण चौक-चौराहों पर पेयजल के लिए सरकारी चापाकल लगा रखा, लेकिन जिले में अभी भी सैकड़ों सरकारी चापाकल खराब पड़े हैं। ऐसा तब है जबकि पीएचइडी विभाग को खराब चापाकालों की संख्या भी पता है। इसके मरम्मत के लिए राशि भी आवंटित की गयी है। लेकिन उदासीनता ऐसी कि अभी भी खराब चापाकलों में से आधे की मरम्मत ही नहीं हो सकी है।
जिले में ठंड के बाद अब गर्मी का एहसास होने लगा है। फगुआ बयार चलने के बीच राह चलते लोगों के हलक भी सूखने लगे हैं। अभी प्रखंड गर्मी आनी बाकी है। लेकिन राह चलते पानी की समस्या से लोग दो चार हो रहे हैं। ऐसा तब है जबकि जिले में सार्वजनिक स्थानों से लेकर महत्वपूर्ण चौक-चौराहों के पास सरकारी चापाकल लगाये गए हैं। लेकिन इनमें से अधिकांश चापाकल खराब पड़े हैं। हालांकि इन चापाकलों से पानी निकल सके, इसकी जिम्मेदारी भी पीएचइडी विभाग को मिली है। पीएचइडी विभाग को खराब चापाकलों की जानकारी भी है और इसकी मरम्मत किये जाने का दावा भी विभाग कर रहा है। लेकिन आंकड़े ही खराब चापाकलों को ठीक करने के प्रयास पर सवाल उठा रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि जिले में 2360 सरकारी चापाकल मामूली खराबी के कारण काफी समय से बंद पड़े थे। इन चापाकलों को ठीक करने की विभाग ने पहल भी की। लेकिन आंकड़ों पर गौर करें तो अभी भी एक हजार से अधिक चापाकलों से पानी नहीं निकल रहा है। ऐसे में इस बार भी गर्मी में राह चलते लोगों की प्यास सरकारी चापाकलों से शायद ही बुझेगी। राहगीरों को इस बार भी होटलों से लेकर किसी के घर के बाहर लगे चापाकल से अपनी प्यास बुझानी पड़ेगी।