प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की शुरुआत इस उद्देश्य से की गई कि गांवों की सड़कें ठीक-ठाक हो जाएंगी। योजना पर अमल हुआ लेकिन अमल करने की पद्धति सही नहीं रही। यहीं कारण रहा कि आज कई सड़कों का निर्माण कार्य अधूरा है। अगर कहीं सड़कें बनकर तैयार भी हैं तो उनकी मरम्मत निर्धारित मापदंड के अनुसार नहीं हो पाता। सड़क निर्माण में कोताही को लेकर निर्माण कार्य में लगी एजेंसी कई बार प्रशासनिक स्तर पर फटकार भी मिली, लेकिन स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है।
विभागीय आंकड़े बताते हैं कि गोपालगंज जिले में वर्तमान समय में कुल 45 सड़कों के निर्माण पर कार्य चल रहा है। इनमें से अब भी करीब तीन सड़कों का निर्माण कार्य अधूरा है। इन सड़कों में दो किलोमीटर से लेकर 16 किलोमीटर लंबी सड़कें शामिल रही हैं। आलम यह कि पूर्व में भी निर्मित की गयी कई सड़कों की मेंटेनेंस पालिसी पूरी तरह से ध्वस्त नजर आती है। अगर कहीं पूर्व में निर्मित सड़क की मरम्मत हुई भी तो चन्द दिनों के बाद ही सड़क फिर उखड़ने लगी। ग्रामीण स्तर पर खराब सड़कों को लेकर शिकायतें भी दर्ज करायी गयी। लेकिन नतीजा सिफर ही रहा है। करीब एक दर्जन क्षतिग्रस्त सड़कें इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं।
बनी व उखड़ गयी सड़कें
प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत सड़कों का निर्माण कार्य हुआ, लेकिन बनने के साथ यह उखड़ने भी लगी हैं। पूरे जिले में ऐसी सड़कों की संख्या तीन है, जहां की सड़क उखड़ने लगी है। इस सड़क पर सरकार की मेंटेनेंस पालिसी पूरी तरह से फ्लाप नजर आ रही है।
भोरे प्रखंड में कई पथ लंबित
प्रधानमंत्री सड़क योजना के तहत बनने वाली कई सड़क का निर्माण भोरे प्रखंड में अधूरा है। इसके अलावा भी कई अन्य प्रखंडों में भी लंबी अवधि से सड़कों का निर्माण कार्य अधूरा है। यह स्थिति तब है, जबकि इसके निर्माण के लिए निर्धारित समय सीमा समाप्त हो चुकी है।