सिधवनिया बाजार में कवि सम्मलेन संपन्न

प्रखंड के सिधवनिया बाजार स्थित स्वामी विवेकानंद सीनियर सेकेंडरी स्कूल के परिसर में रविवार की रात एक शाम कौमी एकता के नाम में कवियों और शायरों ने अपनी रचनाओं से आपसी भाईचारे का संदेश दिया। इस कार्यक्रम की शुरुआत शायर अज्म साकरी ने अपनी रचना, जिंदगी ऐसे गुजारी जा रही है, जैसे कोई जंग हारी जा रही, जिस जगह पहले से जख्म के निशान है, फिर वहीं पर चोट मारी जा रही है.., से किया। इसके बाद तो एक एक कर कार्यक्रम में शामिल कवियों और शायरों ने ऐसी समां बांधी की पूरी रात श्रोता काव्य रस में डुबकी लगाते रहे। इस दौरान कवि डा. सुरेश लाल ने, गीत रचता हूं गीत गाता हूं, दर्द को भी मै गुनगुनाता हूं, तू भी गा ले गुनगुना ले, धड़कने इक बार नफरतों से दूर रहना, जिंदगी है प्यार..., को सुना कर खूब तालियां बटोरी। शायर खुर्शीद अकबर ने नई लज्जत रगों में जागती है, रगों पर जब मुखाहित कांपती है, सुनहरे खाप की दोषी जाहट, मेरे कमरे से बाहर झांकती है.., तो फलक सुल्तान पुरी ने आइना इश्क का धुंधला नहीं होने दूंगी, कोई वादा कभी झूठा नहीं होने दूंगी, तुम मुझे छोड़ चला है तो कोई बात नहीं, मै तेरे प्यार रुक्सत नहीं होने दूंगी.., सुनाया। सोमनाथ ओझा सोमेश ने अपनी रचना, किसी का दर्द है दिल में, किसी के आंख में आंसू.., पेश कर सभी को भाव रस में डुबो दिया। कवि सम्मेलन में सुनैना त्रिपाठी की रचना, उम्मीद भी रखती है और आस भी रखती है, समझो तो नहीं मन में एक आस भी रखती है, औरत को खिलौना मत समझो कि हरेक औरत जज्बात भी रखती है.., पर खूब तालियां बजीं। वाहीद अली वाहिद ने सुबह बनारस मै लिखता हूं, तुम भी अवध की शाम लिखो.., सुना कर भाईचारे का संदेश दिया। कवि सम्मेलन में फजिहत गहमरी, सुनिल कुमार श्रीवास्तव संग, शंकर कैमुरी, ने भी अपनी रचाएं पेश किया। इससे पूर्व कार्यक्रम का उद्घाटन उत्तर प्रदेश के पूर्व एडीजीपी मंजूर अहमद तथा प्राचार्य रामहरि पाण्डेय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्जवलित कर किया। इस मौके पर आयोजन समिति के अध्यक्ष सह कटेया थानाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण महतो, टीएन राय, विश्वरंजन स्वरूप पाठक, नबीबुल्लाह हसन, बीएन तिवारी ने मुख्य अतिथि तथा विशिष्ट अतिथि को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया।

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