हर दिन टूट रहे मानक, व्यवस्था फेल

प्रकृति के साथ छेड़छाड़ के कारण भूकंप जैसी त्रासदी से लोगों को जूझना पड़ता है। बावजूद इसके प्रकृति से छेड़छाड़ बंद नहीं हो रहा है। शहरी इलाकों में धड़ल्ले से भवन का निर्माण कार्य हो रहा है। इसके निर्माण में हर दिन मानक टूटते हैं। लेकिन इसकी परवाह न तो अधिकारियों को है और ना ही व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने की जिम्मेदारी संभाले नगरीय क्षेत्र को। आलम यह है कि यहां बगैर नक्शा पास कराये ही भवन का निर्माण कार्य हो जाता है। लेकिन ऐसे लोगों पर कोई भी कार्रवाई नहीं होती।

सूत्रों की मानें तो मकान बनाने के पूर्व नक्शा पास कराने का नियम सरकारी व गैर सरकारी हरेक तरह के भवन निर्माण पर लागू होता है। लेकिन यहां बनने वाले सरकारी कार्यालय इस नियम को तोड़ रहे हैं। स्थिति यह है कि बगैर नो आब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) तथा नक्शा पास कराये ही हर दिन भवन बनकर तैयार हो रहे हैं। आलम यह है कि कई सरकारी भवन भी बगैर नक्शा पास कराये व एनओसी के ही पूर्ण होने के कगार पर हैं। निजी व सरकारी भवनों के निर्माण से लेकर व्यवसायिक भवन निर्माण के मामले में नगर परिषद लाचार नजर आ रहा है। हालांकि पिछले साल ही एनओसी नहीं लेने वाले निर्माणाधीन सरकारी भवनों को निर्माण को लेकर संबंधित विभाग को नोटिस भेजने की पहल की थी। लेकिन इसके बाद भी एनओसी लेने का मामला जस का तस बना हुआ है। बताते हैं कि भवन निर्माण के पूर्व नक्शा पास कराये जाने का नियम नगर परिषद ने काफी समय से लागू कर रखा है। इस नियम का शत प्रतिशत पालन नहीं होता। नगर परिषद के सूत्रों ने बताया कि पिछले दो-तीन साल में जो भी सरकारी भवन निर्मित कराए गये हैं, उनमें से अधिकांश मामलों में भवन के लिए नो अब्जेक्शन सर्टिफिकेट प्राप्त नहीं किया गया।

भूकंप रोधी भवन का आंकड़ा शून्य

नगर परिषद के सूत्रों की मानें तो जिला मुख्यालय में एक भी भवन भूकंप रोधी नहीं है। कभी इसपर नप की ओर से कड़ाई भी नहीं की गयी। जैसे-तैसे भवन बनते चले। ऐसे में आज शहरी इलाके में जगह की बड़ी समस्या नजर आती है।

क्या है नियम

नियमों की बात करें तो कोई भी भवन बनाने के पूर्व सरकारी विभागों को भी नगर परिषद से एनओसी प्राप्त करना होता है। इसके साथ ही भवन निर्माण का नक्शा तथा निर्माण कार्य के बारे में जानकारी दिये जाने का भी प्रावधान है। अलावा इसके प्रत्येक मकान परिसर में दस फीट में ग्रीन एरिया निर्माण, मकान के तीन तरफ तीन फीट जमीन, हवा व रोशनी की व्यवस्था के साथ ही वाटर चार्जेज सिस्टम भी अस्सी प्रतिशत मकानों में नहीं दिखते।

क्या होती है समस्या

बगैर एनओसी तथा नक्शा के सरकारी भवनों का निर्माण कराए जाने के कारण नगर क्षेत्र के विकास के समय समस्या पैदा होती है। इन समस्याओं में सड़क, नाली, भवन के लिए हवा व पानी की व्यवस्था आदि शामिल हैं।

शहर के मकान मतलब गलियां

जिला मुख्यालय में मकान के निर्माण में नियम की इस कदर अनदेखी की गयी कि आज शहर के सैकड़ों मकानों तक पहुंचने के लिए लोगों को गलियों से गुजरने को विवश होना पड़ता है।

कहते हैं अभियंता

शहरी इलाके में भवन निर्माण कार्य में मानक का उल्लंघन होता है। आलम यह है कि शहरी क्षेत्र में वाटर चार्जेज सिस्टम के तहत एक भी मकान नहीं है। मकानों के निर्माण में इस सिस्टम को शत प्रतिशत लागू करने की व्यवस्था है। सरकारी भवनों में भी इस सिस्टम का ख्याल नहीं रखा गया है।

विमल कुमार

सिविल इंजीनियर

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