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मारो मारो के बीच दब गयी इंद्रदेव साह की चीखें

शुक्रवार की शाम बाइक से घर से निकले इंद्रदेव साह को क्या पता था कि वह अपने जिंदगी के अंतिम सफर पर निकले हैं। अपने गांव गजाधर टोला से वे सेमरा थावे पथ पर थावे स्टेशन के कुछ दूर एक मिनी पिक्चर हाल में समीप पहुंचे ही थे कि अचानक एक लड़का सामने आ गया और ब्रेक लगाते लगाते लड़के को ठोकर लग गयी। यह घटना महज एक छोटा सा हादसा था। लेकिन इसका परिणाम इतना भयानक होगा, इसका अंदाज इंद्रदेव साह को तब लगा जब लाठी डंडा लेकर दर्जन भर लोग उस पर टूट पड़े। लाठी डंडे की हर मार पर इंद्रदेव साह चिखता रहा। लेकिन छोटे से हादसे के बाद भी लोग उतने उत्तेजित हो गए थे कि उनकी मारो मारो के शोर के बीच इंद्रजीत की चिखें दब गयी। इस दौरान कुछ लोग युवक को पीटने वालों को और मारने के लिए ललकार रहे थे तो कुछ लोग महज तमाशाबीन बने इन दर्दनाक नजारे को देख रहे थे। इसी बीच इंद्रदेव साह अधमरा होकर सड़क पर गिर पड़ा। हालांकि तभी इस घटना की जानकारी मिलने पर थावे बाजार आये इंद्रदेव के भाई मनोज गुप्ता वहां पहुंच गए। उनसे इस घटना की सूचना मिलने पर पहुंचे ग्रामीण इंद्रदेव को बेहोशी की हालत में सदर अस्पताल लाये। लेकिन तक तक काफी देर हो चुकी थी। सदर अस्पताल पहुंचते ही युवक की अत्यधिक नाजुक हालत को देखते हुए चिकित्सकों ने उसे गोरखपुर रेफर कर दिया। लेकिन गोरखपुर ले जाते समय रास्ते में ही इंद्रदेव साह ने दम तोड़ दिया।
उजड़ गयी बीपीएल परिवार की दुनिया
छोटे से हादसे के बाद पीट पीट कर मार दिये गए इंद्रदेव साह का परिवार बीपीएल श्रेणी में आता है। इस परिवार का हर सदस्य कोई न कोई काम कर अपने परिवार का पेट पालने में सहयोग करते थे। पीट पीट कर मार डाला गए इंद्रदेव साह ही अपने घर का सबसे अधिक कमाने वाले सदस्य थे। ये ड्राइवरी जानते थे और प्राइवेट वाहन चलाकर जो भी रुपया मिलता था, उससे अपने परिवार की रोजी रोटी चलाते थे। इंद्रदेव साह के पिता भावरानंद साह थावे मंदिर परिसर में छोटी सी दुकान लगाकर प्रसाद बेचते हैं। इनके एक पुत्र ब्रहदेव राजमिस्त्री का काम करते हैं। चार पुत्रों में सबसे छोटे पुत्र अभी काम काज की तलाश में हैं। इस घटना के बाद इंद्रदेव साह का परिवार पूरी तरह से टूट गया है। इंद्रदेव साह को पीट पीट कर मार देने की खबर मिलते ही उनकी मां बेहोश होकर गिर पड़ी। इस घटना से सेमरा गांव को माहौल गमगीन हो गया है। इंद्रदेव की दर्दनाक मौत से सकते में आए ग्रामीणों में रोष भी है। वे यह समझ नहीं पा रहे हैं कि आखिर क्यों एक छोटे से हादसे के कारण इस गरीब परिवार की दुनिया को उजाड़ दिया गया।
डेढ़ माह पूर्व भी दो की पीट कर हुई थी हत्या
- सौ पर प्राथमिकी, किसी की नहीं हुई गिरफ्तारी
 इंद्रदेव साह की पीट पीट कर हत्या कर देने के मामले में शामिल दो आरोपियों को हालांकि प्राथमिकी दर्ज करने के कुछ दूर बाद ही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। लेकिन थावे थाना क्षेत्र के ही केशवपुर गांव में 24 अक्टूबर को दो लोगों की पीट पीट कर हत्या करने के मामले में आज तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई। ऐसे में सेमरा की घटना के बाद यह सवाल उठने लगा है कि कहीं ऐसे मामले में पुलिस की सुस्ती कानून हाथ में लेने वालों का मनोबल तो नहीं बढ़ रही है। बीते 24 अक्टूबर को सिवान जिला के बड़हरिया थाना के माधोपुर मीरा छपरा के रहमततुल्लाह भैंस खरीदने के लिए थावे थाना क्षेत्र के हरदिया गांव आये थे। यहां से वापस अपने लौट रहे थे। तभी केशवपुर गांव में स्थित एक निजी स्कूल के पास बाइक सवार अपराधियों ने इन्हें रोक लिया और इनके पास मौजूद तेरह हजार रुपया तथा मोबाइल छीन कर भागने लगे। इसी बीच पीछे से आ रहे इनके भतीजा ने शोर मचाने पर क्रिकेट खेल रहे किशोरों ने अपराधियों को पकड़ने का प्रयास किया था। लेकिन तभी अपराधियों ने फायरिंग शुरू कर दी। इस गोलीबारी गोली लगने से केशवपुर निवासी यासिर अली घायल हो गया था। इसी बीच वहां पहुंचे ग्रामीणों ने दो युवकों को पीट पीट कर मार डाला था। इस घटना के बाद पुलिस ने सौ से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। लेकिन इस मामले में पुलिस आज तक किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकी। अब तो यह मामला शायद पुलिस की फाइलों में ठंडे बस्ते में चला गया है। हालांकि सेमरा की घटना और केशवपुर की घटनाएं अलग अलग प्रवृत्ति की है। लेकिन सेमरा की घटना ने एक बार फिर से केशवपुर कांड को ताजा कर दिया है। लोग यह कहने लगे हैं कि अगर केशवपुर कांड में कानून हाथ में लेने वालों पर पुलिस ने कार्रवाई किया होता तो शायद सेमरा की घटना नहीं होती। लोग कहने लगे हैं कि ऐसी घटनाओं में कार्रवाई करने में पुलिस की सुस्ती ही कानून हाथ में लेने वालों का मनोबल नहीं बढ़ रही है।
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