किसानों के लिए सिर दर्द बना मैसेज सिस्टम

सिधवलिया में पहले गन्ना गिराने के लिए पर्ची नहीं मिलना किसानों के लिए परेशानी का कारण था। किसान पर्ची के लिए चीनी मिल की दौड़ लगाते थे। अब सिस्टम बदल गया है। किसानों की परेशानी दूर करने के लिए मैसेज सिस्टम लागू किया गया है। इस सिस्टम में किस किसान को कब चीनी मिल में अपना गन्ना गिराना है, इसकी सूचना उनके मोबाइल पर समय से मैसेज भेज कर दिये जाने की पहल की गयी है। लेकिन मैसेज सिस्टम ने किसानों की परेशानी दूर करने की जगह उनका सिर दर्द और बढ़ा दिया है। किसान बताते हैं कि मैसेज सिस्टम लागू होने से यह उम्मीद बढ़ी थी कि गन्ना गिराने को लेकर उनके सामने आ रही समस्याएं दूर हो जाएंगी। लेकिन इस सिस्टम से किसानों की परेशानी दूर होने की जगह और बढ़ गयी है। वे बताते हैं कि अधिकांश किसानों के मोबाइल पर मैसेज भेजा ही नहीं जा रहा है। ऐसे में मैसेज की जानकारी लेने के लिए चीनी मिल की दौड़ लगानी पड़ रही है। किसान बताते है कि चीनी मिल में मैसेज की जानकारी भी तक मिल रही है जब गन्ना गिराने की अंतिम तिथि एकदम से सिर पर आ जाती है। ऐसे में मैसेज की जानकारी लेने के बाद गन्ना कटाई की जाती है और गन्ना मिल में ले जाने के बाद गन्ना गिराने की तिथि बीत जाती है। ऐसी स्थिति में गन्ना गिराने के लिए फिर से किसानों की दौड़ शुरू हो जाती है। किसान बताते हैं कि मैसेज सिस्टम से सबसे अधिक परेशानी का सामना उन किसानों को करना पड़ रहा है, जिनके पास अपने नाम से मोबाइल नंबर नहीं है। इन किसानों ने अपने अगल बगल के लोगों के मोबाइल का नंबर दे दिया है। ऐसे में मैसेज आने के बाद भी वे लोग उस पर ध्यान नहीं देते हैं। किसान को मैसेज आने की जानकारी तक मिलती है जब वह मिल में जाकर इसके बारे में पता लगाते हैं। लेकिन तक तब गन्ना गिराने की तिथि बीत चुकी होती है। ऐसी स्थिति से परेशान गन्ना किसानों ने मैसेज सिस्टम के साथ ही किसानों को गन्ना गिराने की तिथि की जानकारी समय से मिल सके, इसके लिए कुछ और व्यवस्था करने की मांग की है। जिससे गन्ना गिराने में किसानों के सामने आ रही समस्याएं दूर हो सके।

Ads:






Ads Enquiry