सुरक्षा व्यवस्था पर भारी पड़ रहे चोर

शहर से लेकर गांवों तक में इन दिनों चोरों ने आतंक मचा रखा है। पहले इनकी नजर सड़क के किनारे खड़े वाहनों पर थीं। लेकिन अब वाहन चोरों ने घरों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। रात के अंधेरे में ग्रिल काटकर बरामदे में खड़े वाहनों से लेकर घरों से लाखों रुपये मूल्य की संपत्ति की चोरी की घटनाएं बढ़ गयी है। इसके बाद भी पुलिस को इस बात से कोई भी मतलब नहीं है। आंकड़े गवाह हैं कि सितम्बर माह से लेकर अबतक एक भी बड़े वाहन चोर को पुलिस गिरफ्तार नहीं कर सकी है।

पूरे जिले में चोरों का आतंक इतना बढ़ गया है कि घर से बाहर निकलने वाले लोग अपने कार्य की चिंता कम तथा वाहन चोरी की आशंका से अधिक भयभीत रहते हैं। इतना ही नहीं ठंड बढ़ने के साथ ही घरों में भी चोरी की घटनाएं बढ़ गयी हैं। अकेले अक्टूबर व नवम्बर माह के आंकड़े बताते हैं कि इस अवधि में अबतक दो दर्जन से अधिक घरों में चोरी की घटनाएं हो चुकी हैं। अलावा इसके बीस से अधिक वाहन भी चोरी हो चुके हैं। इनमें दोपहिया व चार पाहिया वाहन भी शामिल हैं। आये दिनों हो रही चोरी की घटनाओं से समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की गश्त नहीं होने के कारण चोरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। आलम सह कि घरों में भी गाड़ी व सामान सुरक्षित नहीं हैं। लोगों की मानें तो चोरी की लगातार बढ़ रही घटना के पीछे कारण यह है कि पुलिस सो रही है और चोर दिन व रात दोनों समय जाग रहे हैं।

चोरों की धरपकड़ मात्र कोरम

पुलिस वाहन चोरों के गिरोह का भंडाफोड़ कर पाने में नाकाम रही है। धर पकड़ के नाम पर केवल कोरम पूरा किया जा रहा है। पिछले दो माह के दौरान पूरे जिले में किसी भी बड़े चोर गिरोह का भंडाफोड़ नहीं होना इस बात का पुख्ता सबूत है।

दूसरे जिलों के अपराधियों की सक्रियता

वाहन चोरी की घटनाएं बढ़ने का असली कारण पड़ोसी जिले के अपराधियों की सक्रियता है। पिछले एक साल के दौरान कटिहार, पूर्णिया, चम्पारण, सिवान तथा यूपी के कुशीनगर के कुछ युवक भी चोरी के मामले में पकड़े गये हैं। इसके बाद भी इन गिरोहों को संचालित करने वाले अब भी पुलिस की पहुंच से दूर हैं।

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