रहे हौसला बुलंद तो कुछ भी नहीं नामुमकिन, तूफानों में भी चिराग जला करते है। इस शेर को चरितार्थ कर रहे हैं रुपनचक गांव के अस्सी वर्षीय बुजुर्ग जयबहादुर सिंह। किसी ने सोचा तक नहीं था कि पिछले कई दशक से जल निकासी नाला के अभाव में पूरे साल झाड़ियों से ढंका रहने वाला बदहाल पिपरा चौर भी कभी सोना उगलेगा। लेकिन इसी चौर में जलमग्न छोटे खेतों को तालाब बनाकर बुजुर्ग जयबहादुर अब युवाओं को मत्स्य पालन की राह दिखा रहे हैं।