नगर थाना क्षेत्र में भितभेरवां गांव के विक्रमा पाल उस अपराध के लिए छह माह तक जेल में बंद रहे, जो उन्होंने किया ही नहीं था। वे पुलिस से बार-बार यह कहते रहे कि उन्होने अपनी बहू की हत्या नहीं की है। लेकिन तब उनकी पुलिस ने एक भी नहीं सुनी। गिरफ्तारी के बाद उन्हें पुलिस ने जेल भेज दिया। हद तो यह कि पुलिस ने अपने अनुसंधान में कांड को सत्य पाते हुए ससुर के खिलाफ आरोप पत्र भी समर्पित कर दिया। लेकिन घटना के करीब 11 माह बाद अचानक बहू जिंदा सामने आ गयी। पुलिस ने कथित रूप से मृत घोषित की गयी बहू को उसके मायके से ही बरामद कर लिया। बुधवार को बरामद महिला को कोर्ट में बयान के लिए प्रस्तुत किया गया।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि उत्तरप्रदेश के कुशीनगर जिले के खामपार थाना क्षेत्र के परोहा उत्तर टोला गांव के सत्यनारायण पाल ने अपनी पुत्री मंजू देवी की शादी नगर थाना क्षेत्र के भितभेरवां गांव के विक्रमा पाल के पुत्र गुड्डू पाल के साथ वर्ष 2013 में ही थी। शादी के बाद मंजू अपने ससुराल गयी। गत वर्ष मार्च माह में सत्यनारायण पाल ने मंजू देवी की दहेज में बाइक के लिए हत्या किये जाने के आरोप में अपने दामाद गुड्डू पाल व समधी विक्रमा पाल सहित तीन लोगों के विरुद्ध नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी। आठ मार्च 2015 को कांड अंकित करने के बाद पुलिस ने आरोपी ससुर विक्रमा पाल को 21 मार्च 2015 को गिरफ्तार कर इस कांड में जेल भेज दिया। तब विक्रमा ने पुलिस को यह बताने का प्रयास किया कि उनके परिवार के लोगों ने बहू की हत्या नहीं की है। लेकिन पुलिस ने उसकी एक भी नहीं सुनी। पुलिस ने गिरफ्तार विक्रमा पाल के विरुद्ध 21 जुलाई को आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया, और आरोप पत्र के आलोक में न्यायालय ने आरोपी के विरुद्ध संज्ञान भी ले लिया। इसी बीच हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद मंजू की हत्या के आरोप में जेल में बंद विक्रमा को छह माह बाद जमानत मिल गयी। इसी बीच नगर थाने की पुलिस को कहीं से गुप्त सूचना मिली कि मंजू देवी अभी जिंदा है और अपने मायके में रह रही है। इस सूचना के बाद नगर थाना के दरोगा बालेश्वर पासवान ने मंजू के मायके में छापामारी कर उसे जिंदा बरामद कर लिया। बुधवार को दरोगा बालेश्वर पासवान ने मंजू को बयान के लिए कोर्ट में प्रस्तुत किया। जहां महिला का बयान दर्ज किया गया।
अनुसंधान के तरीके पर भी उठे सवाल : नगर थाना क्षेत्र के भितभेरवां गांव में हुई कथित दहेज हत्या को लेकर थाने में कांड अंकित होने के बाद पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठने लगे हैं। बताया जाता है कि इस कांड का अनुसंधान नगर थाने में तैनात अनि ब्रह्मादेव पड़ित तथा अनि मनोज कुमार सिंह ने की थी। इन्हीं दोनों ने अनुसंधान के बाद गत 21 जुलाई को इस कांड में आरोप पत्र दाखिल किया। इस आरोप पत्र में पुलिस ने इस बात को स्वीकार किया तो मंजू की हत्या की घटना सत्य है।