पंचायतों में व्यवस्था आधी अधूरी है। लेकिन इसी व्यवस्था से सुदृढ़ पंचायती राज व्यवस्था का सपना देखा जा रहा है। पंचायतों में भवन से लेकर कर्मी तक का अभाव सरकार की व्यवस्था पर भारी पड़ती नजर आ रही है। कर्मियों की कमी के कारण सरकार की योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पाती हैं। विभागीय आंकड़े बताते हैं कि सभी चौदह प्रखंडों में पंचायत पर्यवेक्षकों तक की व्यवस्था नहीं हो सकी है। करीब सात दर्जन पंचायतों में विकास की कमान राजस्व कर्मचारियों के जिम्मे हैं। ऐसे में सफल पंचायती राज व्यवस्था के बारे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
आज पंचायतों के माध्यम से ही विकास को गति देने की योजनाएं बन रही हैं। इंदिरा आवास, मनरेगा, बीआरजीएफ, 12वां व 13वां वित्त आयोग, गांवों में सोलर लाइट से लेकर ग्रामीण सड़क तक के निर्माण की जिम्मेदारी व जवाबदेही पंचायतों की है। पंचायतों में विकास कार्य की जवाबदेही पूरी तरह से पंचायत सचिवों की है। लेकिन विकास कार्य को गति देने के लिए पंचायत सचिव ही नहीं हैं। बात पंचायत सचिवों तक ही समाप्त नहीं होती। ग्राम कचहरियों की दशा भी कहीं से ठीक नहीं दिखती। यहां की व्यवस्था का संचालन ग्राम कचहरी के सचिवों के जिम्मे है। लेकिन इनके भी 34 पद वर्षो से रिक्त पड़े हैं।
अधर में पंचायत सरकार भवन
पंचायतों को सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पंचायत सरकार भवन बनाने की कवायद करीब चार साल पूर्व शुरू की गयी थी। लेकिन अबतक पंचायत सरकार भवन निर्माण का कार्य अधर में ही लटका हुआ है। पंचायती राज विभाग के आंकड़े बताते हैं कि पंचायत सरकार भवनों के निर्माण की कार्रवाई शुरू की गयी है। बावजूद इसके अब भी सात पंचायत सरकार भवन के लिए जमीन की तलाश का कार्य पूर्ण नहीं किया जा सका है।